समदिया: एकटा टटका ब्लोग

मैथिली भाषा’क विकास भ’ रहल अछि. यदि गाम घर मे रहनिहार मैथिली’क कम सँ कम प्रयोग करैत छथि ते इन्टरनेट पर रहनिहार बेसी. २००७ मे लगभग एक दर्जन मैथिली ब्लोग’क अवतार भेल अछि. ओरकुट पर एकटा हम कम्यूनिटी शुरु केने छलहुँ. ओकर नाम छल आई एम द प्राउड मैथिली ब्लोगर (हम एकटा गौरवशाली मैथिली ब्लोगर छी). हमरा नहि विश्वास छल जे एहि क्म्यूनिटी’क सँख्याँ २-३टा सँ बेसी होयत. आई फेर सँ ओहि कम्यूनिटी केँ विजीट कायल. पता चलल जे ओकर सदस्य ९ टा भ’ गेल अछि.

एहि लेख मे हम बात करब एकटा नव ब्लोग’क. एकर नाम थीक समदिया…. हमरा बुझने समदिया’क अर्थ होयत अछि एहेन आदमी जे एक जगह के सँवाद केँ दोसर जगह मे पहुँचाबे. पौराणिक समय मे एहेन आदमी केँ दूत कहल जाइत छलैक. कोनो भी समाज मे दूत’क बहुत महत्वपूर्ण स्थान होइत छल. दूत लोकनि एतबे महत्वपूर्ण होइत छलाह जे यूद्धो के समय मे दूत लोकनि के उपर किओ हाथ नहि लगबित छलाह. रमायण मे जखन अँगद के रावण पकड़बाक लेल कहलथिन्ह ते विभीषण हुनका सावधान केने छलथिन्ह जे दूत केँ नहि छुबल जाए नहि ते अनर्थ भ’ जायत. रावण नहि मनलाह आ ओकर फल हुनका भोगय पड़लन्हि.

समदिया’क एक टा आओर मतलब होइत अछि… हिन्दी मे एकरा सँवाददाता’क नाम सँ जानल जाइत अछि. चलू एतय जे समदिया’क बारे हम बात करैत छलहुँ ओ पेशा सँ पत्रकार छथि. लिखनाई पढ़नाई हुनकर प्रकृति मे छन्हि आ एहि ब्लोग’क शुरुआत किछु उद्देश्य सँ कयने छथि.  समदिया’क लेखक छथि श्री रोशन झा. हम रौशन झा जी’क बारे मे की लिखब चलू हुनके मुँह सँ सुनु:

dsc_0014.jpgहमर नाम रौशन झा छी आ गाम मधुबनी जिलाक लखनौर गामक रहिका टोल परैत अहि। स्कूलक शिक्षा गामक स्कूल सं पूरा केला के बाद दिल्ली के रुख कायल। उंच शिक्षा दिल्ली विश्वविद्यालय सं पूरा केलों। हिंदी विषय में एम् ए केला के बाद पत्रकारिता कायल आ सम्प्रति देशक प्रतिष्ठित अख़बार अमर उजाला में बतौर खेल पत्रकार कार्यरत छी। हमर पता रौशन कुमार झा ११५७, टाइप – २ तिमारपुर, दिल्ली – 54 फ़ोन 9350216092

समदिया जी कनि मनि हमरो लोकनिक उपर मे ध्यान देबैक.

11 Comments

  1. 1
    Roushan Kumar Jha Says:

    sir ham ahan ke kon shabd me dhanyavad kari se nai bujha rahal ai. ham ta nimit matra chi muda ahan apna hriday me hamra je sthan del tahi sa ham kritarth chi. ham ekhan patrakarita me matra ek saal puran chi i aa hamar shurat chi. agar ahan san lok hamra ai tarhe housla afjahi kartah ta nischite ham ek din maithili ke nam ke jaroor ‘roushan’ karab.

    Roushan Jha

  2. 2
    कुन्दन कुमार मल्लिक Says:

    अहाँ लिखैत छी जे दूत के नहिं पकडबाक चाही कियैक जे एहि सs अनर्थ भs जायत। मुदा एहि स पैघ अनर्थ की भ सकैत छैक जेखन अहाँ “रामायण” केँ “रमायण” आ “हनुमान” केँ स्थान पर “अंगद” केँ स्थानांतरित कय देलन्हि। लेखन के संगे-संग किछु ध्यान भाषा, व्याकरण आ प्रूफ रीडींग पर सेहो दियौक तखन मैथिली भाषा’क विकास होयत.

    अपनेक-
    कुन्दन कुमार मल्लिक,
    बंगलोर (भारत)
    मो.- +91-9740166527

  3. कुन्दन जी,

    हम कोनो पेशेवर लेखक नहि छी. हमर उद्देश्य केवल एतबी अछि जे मैथिली भाषा’क इन्टरनेट पर प्रचाय प्रसार होमय. एतबी बुझि लिए नहि मामा सँ काना मामा सही. दोसर बात जे सोफ्टवेयर कम्पनी मे काज करैत छी समय’क आभाव रहति अछि. केवल प्रूफ रीडिँग के चक्कर मे लिखनाई नहि छोड़ि सकैत छी. तेसर बात अपना लोकनि एत्तेक मेच्योर नहि भेलहुँ अछि जे एकरा एना पोइन्ट आउट करी. व्यक्तिगत रुप मे हम अहाँक आलोचक वाला नजरिया’क स्वागत करैत छी.

  4. 4
    कुन्दन कुमार मल्लिक Says:

    पद्मनाभजी,
    हमर टिप्पणी सs अहाँ के जे दुःख पहुँचल ताहि लेल क्षमाप्रार्थी छी। मुदा हमर अभिप्राय इ नहिं छल जे हम अपन टिप्पणी सs किनको उपहास उडाबी वा की किनको कष्ट पहुँचाबी। हमर उद्देशय एतबे छल जे किछु मूलभूत बात’क तरफ अपनेक ध्यान आकर्षित करी आओर हम एहि बात के स्वीकार करैत छी जे जोश में आबि के किछु तीक्ष्ण भाषा’क प्रयोग कय बैठलहुँ। अहाँ हमर इ बात मानू जे एहि केर पाछू एक्केटा चीज अछि ओ अछि हमर मैथिली प्रेम।
    एक टा खास बात आओर जे एहिठाम केओ पेशेवर नहिं छथि, नहिं अहाँ नहिं हम, आ नहिं किओ साहित्यिक पृष्ठभूमि सs आयल छथि। व्यस्तता केवल सॉफ्टवेयर फिल्ड में नहिं अपितु सभ जगह छैक।
    चलैत-चलैत एक बेर फेर सs क्षमा चाहैत छी।

    अपनेक-
    कुन्दन कुमार मल्लिक, बंगलोर, सम्पर्क- +91-97401 66527,
    E-mail- kundanmallick@yahoo.com

  5. अरे कुन्दन जी,

    अहुँ हमर बात के दोसर तरह सँ ल’ लेलहुँ. हम अहाँ सँ १००% सहमत छी आई काल्हुक भागम भाग मे ककरो समय नहि रहैत छैक, आ एतय किओ पेशेवर नहि छथि. आ अपन जोश केँ कम नहि करु. अहाँक अगिला पोस्ट’क (लेख) हम बाट ताकि रहल छी

  6. 6
    hira Says:

    shriman
    maithlik e_prayas , maithil par visvas

    dhanybad

  7. 7

    पद्मनाभ जी , कतेक रास बातक माध्यम स अहां स किछु दिन पहिले सं परिचित छी . मैथिली-प्रेमी हमहू छी , मुदा अहां जकां किछु ठोस नहिं क’ सकल छी . अहांक प्रयास सराहनीय अछि . अहांक टटका कथा सेहो नीक लागल .
    राज कुमार झा , रांची

  8. 8
    ashish anchinhar Says:

    matik loka padhalanhu. neek lagal .alochana neek hoit chhaik jan ekra neek view san lel jaen.
    vida fer bhetbak lel

  9. 9
    vasant jha Says:

    sabse pahal “katak raas baat k sab ke hamar tarfe pranam
    Dhabahik upaniyas ke naka aank kahaya tak ayat bahut din se entajar aach
    ahak
    Basant jha
    Msc(math)

  10. 10
    Rajesh Ranjan Jha Says:

    Ahan Sab Maithil Bhai ken Hamra taraf san Pranam!

    Are Bap re Bap Aai hamra e site kholi ke Kushi ke thikana nai Aichh, Hoit aichh je Gaamak Machan par Baisal Chhi. Wah Abhutpurv lagal .
    Muda ek baat kahnai Jayaj bujhait aichh je Pujniy Roshan jee ke likhal Ramayan ke ego dut wala baat par Aadarniy Kundan jee ke aalochna me dut ke jagah thik Chhal, asal me dut ANGAD BANI K GEL CHHALAH.

    Bishesh Dosar Ber
    Apnek
    Rajesh

  11. 11
    maithiliakademidelhi Says:

    रोशन जी,
    समदिया तँ पढलहुँ मुदा बहुत दिनसँ अपडेट नहि भए रहल अछि।
    गजेन्द्र ठाकुर
    http://www.videha.co.in/


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