एक बदलैत परिभाषा

mith_marrएहि आर्टिकल केँ लिखै सँ पहिने हमरा दू टा चीज मोन पड़ैत अछि.  एकटा ते खट्टर काका’क तरँग मे हरिमोहन झा’क खट्टर काका’क मुँह सँ निकलल बात, “जे कोनो सँस्कृति’क विकास ककरो गुलाम नहि होइत छैक”,  मिथिला’क सँस्कृति मे यदि ताकत रहतैक ते दूनियाँक कोनो ताकत एकरा मिटा नहि सकैत छैक. सँगहि यदि ई सँस्कृति केवल आडम्बर आ पाखण्ड पर आधारित छैक ते एकरा मिटबा सँ कियो नहि बचा सकैत छैक.

दोसर बात मोन पड़ल जे हम अपन पापा केँ प्रणाम किएक करैत छी. की केवल हाथ मिलेला सँ काज नहि चलि जायत. विदेश मे ते लोक केवल हाथे टा मिलबैत छैक ते की विदेश’क लोक अपन बाप आ माई सँ प्रेम करनाई बन्द क’ दैत छैक. आ विदेशे के बात किएक, मानि लिअ हमरा अपन पापा’क प्रति ओएह श्रद्धा, ओएह प्रेम आ ओएह आदर रहय मुदा हम हुनका पैर छुबि केँ नहि हुनका सँ हाथ मिला के अभिवादन करी ते की हमर आदर हुनका लेल कम भ’ जायत… इत्यादि…इत्यादि…

हम अपन पापा केँ पैर एहि कारण नहि छुबैत छी जे हमरा पापा’क प्रति आदर अछि वा हम हुनकर सम्मान करैत छिअन्हि. बल्कि एहि दुआरेँ कि ई हमर सँस्कृति थीक. बिना पैर छुने सेहो हम हुनकर सम्मान क’ सकैत छिअन्हि मुदा बिना पैर छुबे वला सम्मान’क माप अलग होयत आ पैर छुबि केँ जे सम्मान दैत छियैक ओकर बात अलग. अतएब ई बात ते तय छैक जे कोनो भी सँस्कृतिक किछु एहेन बात होइत छैक जकरा कोनो तर्क द्वारा सिद्ध नहि कयल जा सकैत छैक. ओ स्वँय-सिद्ध होइत छैक. सँस्कृति’क एकटा आओर बात होइत छैक जे समय ओकरा उपर मे बहुत प्रयोग केने रहैत छैक कालान्तर मे ओहि मे कोनो बदलाव नहि होइत छैक. पैर छुबि केँ अपना सँ श्रेष्ठ व्यक्ति केँ अभिवादन करनाय एकर सबसँ विशेष उदाहरण थीक.

समय के साथ सँस्कृति मे बदलाव आबैत छैक. एक सँस्कृति टहलि केँ दोसर सँस्कृति’क लग पहुँचैत छैक, फेर ओ एक दोसर’क अवयव’क फेर बदल करैत छैक आ एहि सँ सँस्कृति मे बदलाव आबैत छैक. आ एहि बदलाव सँ  सँस्कृति’क विकास क्रमशः होइत जाइत छैक.

सँस्कृतिक विकास आ बदलाव सगरे भ’ रहल अछि. एकर असर मैथिल’क विवाह पद्धति पर सेहो पड़ल अछि. निम्न चीज जे पहिने मैथिल’क विवाह मे नहि छल आब बहुत सामन्य भ’ गेल अछि:

१. जयमाल: एहि विधि  मे कन्या आ वर एक दोसर केँ माला पहिराबैत छथि. वर आ कन्या दुनू परिवार’क लोक आ बराती मौजूद रहैत छैक.

२. जूता चोरी: पहिने ई प्रथा पूर्वी उत्तर-प्रदेश मे प्रचलित छल, जाहि मे कन्या’क बहिन मिलि वर’क जूता चोरी करैत छथि आ वापस तखने करैत छथि जखन वर’क तरफ सँ किछु गिफ्ट भेटि जाई.  आब मिथिला’क लगभग प्रत्येक कोन मे ई प्रचलित अछि.

आधूनिक मैथिल केँ जे सबसँ खराप लागैत छैक ओ छैक जे मैथिल’क विवाह मे कोनो नाच गाना नहि होइत छैक. आ क्रमशः आब किछु विवाह मे ई शुरु भ’ गेल अछि. हमर कहब केवल एतबे अछि जे कोनो ते लक्ष्मन रेखा खीच’क चाही जकरा अपना लोकनि केँ नाँघबाक नहि चाही. नहि ते आई अपना लोकनि नाच गाना आर्केस्ट्रा के रीकमेन्ड करैत छी, काल्हि दारू शराब केँ आ परसू किछो आओर केँ.

एहि क्रम मे केवल मैथिले यूवक एकरा नियन्त्रित कय सकैत छथि. तेँ विवाह मे किछु नव करबा सँ पहिने एक बेर जरूर सोची जे कालान्तर मे ओकर केहेन प्रभाव पड़त.

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