Archive for December 27th, 2007

एक बदलैत परिभाषा

December 27, 2007

एहि आर्टिकल केँ लिखै सँ पहिने हमरा दू टा चीज मोन पड़ैत अछि.  एकटा ते खट्टर काका’क तरँग मे हरिमोहन झा’क खट्टर काका’क मुँह सँ निकलल बात, “जे कोनो सँस्कृति’क विकास ककरो गुलाम नहि होइत छैक”,  मिथिला’क सँस्कृति मे यदि ताकत रहतैक ते दूनियाँक कोनो ताकत एकरा मिटा नहि सकैत छैक. सँगहि यदि ई सँस्कृति [...]