एहि आर्टिकल केँ लिखै सँ पहिने हमरा दू टा चीज मोन पड़ैत अछि. एकटा ते खट्टर काका’क तरँग मे हरिमोहन झा’क खट्टर काका’क मुँह सँ निकलल बात, “जे कोनो सँस्कृति’क विकास ककरो गुलाम नहि होइत छैक”, मिथिला’क सँस्कृति मे यदि ताकत रहतैक ते दूनियाँक कोनो ताकत एकरा मिटा नहि सकैत छैक. सँगहि यदि ई सँस्कृति [...]