मैथिली: स्वंयसेवी साहित्य….

चन्दा…मैथिली साहित्य’क…..

प्रिय मैथिल बन्धु;
हमर नाम पद्मनाभ मिश्र थीक.एहि ब्लोगक शीर्षक पढ़ि कनिएँ अजीब सन जरूर लागल होयत. मुदा जेहने नाम ओहने काज. मतलब ई एकटा प्रयास अछि जाहि मे एकटा कहानी लिखबा के कतेको लेखक’क योगदान रहतन्हि. एतय हम सब मिलजुलि केँ समुहिक योगदान सँ साहित्य स्रीजन करब.एक कहानी’क शुरुआत किओ करताह, परवान किओ आर चढ़ौथीन्ह आ खतम किओ आर करथीन्ह. बस अपने सँ अपेक्षा जे कहानी’क नाँगरि बढ़ाबैत जाऊ… बढाबैत जाऊ ताबय तक जाबय तक खतम करबाक स्थिति नहि आबि जाए. एकरा कहल जाइत अछि कोलोबोरेटिव लिटेरेचर यानी स्वंयसेवी साहित्य….मैथिली

One Comment

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