हमरा बुझल अछि जे इन्टरनेट पर उपलब्ध एहि ब्लोग केँ एहेन लोक पढताह जे कोनो न’ कोनो तरहेँ बहुराष्ट्रीय कम्पनी मे काज करैत छथि वा पढाइ क’ रहल छथि. दुनू स्थिति मे हिनका लोकनि केँ मैथिली साहित्य पढबाक अवसर नहि भेटि सकैत छैक. मैथिली साहित्य बहुत धनीक अछि आ आधूनिक मैथिल यूवक केँ एहि साहित्य सँ प्रेम होयबाक चाही. नहि ते मैथिली भाषा’क ओएह स्थिति होयत जेना आई पाली आ प्राकृत के भ’ गेल अछि. एहि क्रम मे एहि पोथी’क समीक्षा लिखल गेल किताब’क एकटा लेखा-जोखा प्रदान करत आ मैथिल यूवक केँ अपन साहित्य पढबाक लेल प्रेरित करत.
एहि पन्ना पर मैथिली’क मे प्रकाशित पुस्तक’क समीक्षा कायल जायत. यदि अपने लोकनि हाल मे कोनो मैथिली किताब पढने होयब त समीक्षा जरूर लिखि. ई दोसर लोकनि केँ प्रेरित करबा मे मदद करत.
फिलहाल निम्नलिखित पोथी’क समीक्षा उप्लब्ध अछि.
१. खट्टर काका’क तरँग, लेखक- प्रो. हरिमोहन झा, पोथी’क प्राप्ति स्थान: गोविन्द मित्र रोड पटना-४ . एहि समीक्षा पढबाक लेल एतय क्लिक करु .
समीक्षक- पद्मनाभ मिश्र
Dear Sirs,
This is the frist time I’ve visited this website. There is not written about Nepaliya maithili writers.
In Nepal, somebody has consept about Dr. Direshwor Jha ‘Direndra’ is belonging to India but you don’t have mention about him……
plz convey me
Thanking U
Santosh Kr. Mishra