आई हमर एडिनबर्ग (हम एहिना उच्चारण करब) शहर मे अन्तिम दिन थीक. कुल मिला केँ चारि दिन रहबाक छल एतय. पहिल दू दिन’क वर्णन हम पहिने कऽ देने छी आ बाँकी दू दिन’क वर्णन केँ एहि भाग मे लिख रहल छी.
वर्ल्ड इज फ्लैट आ एडिनबर्ग:
एडिनबर्ग शहर मे आबए सँ किछु दिन पहिने हम थामस फ्रेडमेन लिखित किताब “द वर्ल्ड इज फ्लैट” पढ़ने छलहुँ. लेखक कहैत छथि जे दुनियाँ आब गोल नहि सपाट अछि. धरती केँ सपाट करबाक बहुत कारण छैक जाहि मे बर्लिन’क दीबार’क ढाहनाय (पूर्वी जर्मनी आ पश्चिमी जर्मनी के विलय), ब्रौडबैन्ड इन्टरनेट, कम्प्यूटर साफ्टवेयर, ओपेन सोर्स, अमेरिका’क काम-काज केँ भारत मे आउटसोर्सिँग, व्यक्तिगत कम्प्यूटर उपकरण (मोबाइल, लैप्टोप, पी.डी.ए) इत्यादि दुनियाँ मे कोनो भी दू टा अन्जान व्यक्ति के पास आनि देलक. तेँ २१वीँ शदी मे दुनियाँ सपाट भऽ गेल.
लागैत अछि फ्रेडमेन साहेब एडिनबर्ग शहर मे नहि घुमलाह, नहि तऽ एहेन बात कहियो ने कहि सकैत छलैथि. एडिनबर्ग एकटा एहेन शहर अछि जाहि मे विकास बहुत भेल अछि मुदा पुरातन सभ्यता सँ कोनो छेड़-छाड़ नहि काएल गेल अछि. फ्रेडमेन सहाब भारत मे बहुत दिन धरि रहलाह आ भारत मे धोती कूर्ता सँ जीन्स टी शर्ट मे बदलैत सभ्यता पर दुनियाँ के एके शब्द मे सपाट कहि देलाह, एडिनबर्ग मे देखलहुँ जे गली गली मे पारम्परिक परिधान’क दोकान छलैक. एतय जेन्टलमेन’क पारम्परिक परिधान मे होइत छैक स्काटलैन्ड’क रँग मे स्कर्ट, सर्ट, विशेष टाई, विशेष फर वाला टोपी पैर सँ एक फीट ऊँच जूता एकटा मफलर इत्यादि. एतुका स्थानीय लोक सँ पुछलहुँ ते पता चलल जे एतय कोनो भी पारम्परिक काज त्योहार मे, शादी विवाह’क मौका पर लोक सब इएह पारम्परिक परिधान पहिरैत अछि. दोकान सब मे जा जा केँ एतुका पारम्परिक परिधान के बिकैत देखि मोन प्रसन्न भऽ गेल. एतुका लोक कहलक जे एतुका सँस्कृति के सेहो अमेरिका सँ खतरा अछि. ई गणना एत्तेक कम्प्लेक्स छैक जे बुझि मे नहिँ आयल जे एना अमेरिके सँ पूरे दुनियाँ के किएक खतरा छैक आ तैयो दुनियाँ सपाट किएक छैक.
एहि बात सँ एकटा आओर बात याद आबि गेल. बात बात मे एतुका लोक जेन्टमेन’क प्रयोग करैत छथि. आधूनिक बँग्ला भाषा मे सेहो भद्रो-पुरुष आ भद्रो महिला’क प्रयोग बारम्बार होइत छैक. एकटा बँगाली मित्र सँ विवाद भऽ गेल हम जवाब देने छलहुँ जे मिथिला मे रहय वाला प्रत्येक आदमी भद्र पुरुष होइत छथि आ प्रत्येक महिला भद्र महिला होइत अछि. तेँ हमरा लोकनि भद्र शब्द’क उपयोग नहि करैत छी. इ तऽ भेल मजाक वाला बात. असल बात ई अछि जे कलकत्ता मे अन्ग्रेज’क असर सबसँ बेसी पड़ल अछि तेँ बँग्ला भाषा मे जेन्टलमेन’क सीधे अनुवाद कए भद्रो पुरुष कए दैत छथि.
जेना पहिल भाग मे लिखने छलहुँ एडिनबर्ग शहर मे भारते जेकाँ फूटपाथ पर समान बेचल जाइत छैक. भारत जेकाँ ओतेक दोकान फूटपाथ पर नहि रहैत छैक मुदा एक दू टा दोकान कतओ ने कतओ अवश्ये भेट जायत. पहिल बेर देखलहुँ जे ठेला पर शराब बिकैत. फूटपाथ पर उनी कपड़ा बिकैत. एक जगह त पथिया मे उनी कपड़ा बिकैत छल आ हम अपन कैमरा मे ओकरा सहेज लेलहुँ जे बगल वाला फोटो मे अछि. बहुते अजीब सन लागैत अछि जखन हर जगह भीड़ मे एहेन आदमी भेटि जायत जे जवान अछि आ सिर सँ पैर धरि उनी कपड़ा सँ लदल अछि. ओहि ठाम ओही जगह पर देखऽ मे आबि जायत जे एकटा बुढ़ आदमी केवल एकटा टीशर्ट पहिरने ठाढ छथि. ई बात हम तखन कहि रहल छी जखन बाहर’क तापमान १२ डिग्री सेन्टिग्रेड छल हवा एत्तेक जोर सँ चलि रहल छल जे हम एकटा स्वेटर मे काँपि रहल छलहुँ.
चूँकि स्काटलैण्ड उत्तरी ध्रूव सँ भारत के अपेक्षा बेसी निकट अछि तेँ एतय दिन राति अवधि मे अन्तर होइत छैक. एतुका स्थानीय समयानुसार साढ़े तीन बजे सूरज भगवान एगि जाति छथि, आ राति मे साढ़े नओ बजे धरि उगल रहैत छथि. एकर मतलब एतय राति केवल छओ घँटा के आ दिन अठारह घँटा के होइत अछि. मुदा ठँड’क मौसम मे ई उल्टा भऽ जाइत छैक. चूँकि राति आ दिन’क अवधि मे एत्तेक फड़क पड़ैत छैक तेँ सोचलहुँ जरूर एतुका जीवन यापन मे एकर असर पड़ना चाही. पहिने हम अपने सँ शुरु करब. राति केँ जखन साढे नओ बजे जखन हम सूतय लेल जाइत छलहुँ ते खिड़की’क पर्दा’क दोग सँ सूरज भगवान नुका छिपि खेलैत छलाह. नीक सँ सूतियो ने पाबी की साढ़े तीन बजे नूका छिपि फेर सँ शुरु भऽ जाए. एतुका लोक सब कोना मैनेज करैत छथि से भगवान जानैथि. 
राति दिन’क अन्तर सँ एतुका लोक मे असर के खोज केनाय शुरु केलहुँ. सबसँ पहिने जे देखलहुँ ओ छल स्कूल मे बच्चा सबकेँ एनाय आ जेनाय. देखलहुँ एतय लगभग दस बजे बच्चा लोकनि स्कूल जैत छथि आ चारि बजे छुट्टी भऽ जाइत छैक. अचानक याद आबए लागल हमरो लोकनि तेँ एहिना पढ़लहुँ. रोज दस बजे खाना खा केँ स्कूल आ चारि बजे छूट्टी. मुदा भारत आब’क स्कूल तऽ सात-आठ बजे सँ एक-दू बजे धरि होइत छैक से अन्तर किएक. बुझि मे आयल कोलोनियल हैन्ग ओवर एखन धरि गेल नहि अछि. अन्ग्रेज लोकनि दस सँ चारि धरि स्कूल चलौलैथि आब तथाकथित दुनियाँ’क सपाट भेला’क बाद मतलब अमेरिकी कानवेन्ट स्कूल हिसाब सँ सात सँ एक बजे धरि चलैत छैक. मतलब ई जे ईग्लिश हैन्ग ओवर सँ अमेरिकन हैँगओवर. बिहार सरकार सेहो सात सँ एक बजे धरि स्कूल कऽ देने अछि.
एहि सँ पहिने की दिन राति के अन्तर सँ पड़ैत जीवन यापन के बाँकी असर केँ बताबी, एकटा घटना याद आबि रहल अछि. हमरा आ हमर कनियाँ मे ओतुबी अन्तर छैक जेना उत्तरी ध्रूव आ दक्षिणी ध्रूव. हम एकटा अविकसित गाम’क घटिया सन स्कूल मे पढ़ने छी तऽ हमर कनियाँ बिहार’क सबसँ नीक स्कूल मे सँ एक नोट्रेडेम एकेडमी मे पढ़ने छथि. बहुत जानल बात अछि जे हुनकर अन्ग्रेजी हमरा सँ बढ़ियाँ छन्हि. मुदा एक दिन हम कनियाँ केँ पुछि देलिअन्हि जे बताबु जे डिनर ककरा कहल जाइत छैक. कनियाँ एत्तेक छोट प्रश्न जवब देनाइ अपन प्रतिष्ठा के खिलाफ बुझैत छलीह ते जवाब आसानी सँ नहि दैत छलीह. हम चुनौती देलिअन्हि ते कहलैथि “डिनर मतलब राति’क खाना”.
हम कोनो पेशेवर लेखक नहिँ छी. बिल्कूल साधारण सन इन्टरनेट सैवी छी. ब्लोग अन्ग्रेजी मे नहि बना एकरा मैथिली मे बनेने छी. ई एकटा यात्रा वृताँत एछि एकर पहिल भाग जे हमरा हिसाब सँ बेसी बढियाँ अछि ओ एतय क्लिक केला पर भेटि सकैत अछि.
हम कहलिअन्हि जे डिनर के मतलब होइत अछि दिन’क खाना . हुनका पहिने विश्वास नहि होइत छलन्हि. आक्स्फोर्ड’क डिक्शनरी निकालि केँ देखा देलिअन्हि ते विश्वास भेलन्हि. मुदा बाद मे ओहो सोच मे पड़ि गेलीह जे एना किएक. दिन’क खाना केँ तऽ लन्च कहल जाइत छैक. पहिने हमरो बुझल नहि छल. एडिनबर्ग एला सँ सब शँका दूर भऽ गेल. एतय साँझ’क साढे सात बजे डिनर के नाम पर खाना शुरु होइत छैक. जखन ई तथाकथित खाना शुरु होइत छैक सूरज भगवान ओहने चमकैत छथि जेना मार्च’क महीना मे दिन’क तीन बजे भारत मे चमकैत अछि. डिनर पूरे चौबीसो घँटा के सबसँ महत्वपूर्ण खाना होइत अछि आ सूरज उगल रहले पर खायल जायत छैक ते ओकरा दिन’क खाना कहल जाइत छैक.
एहि रचना केँ हम एकटा यात्रा वृताँत’क भाँति लिखय चाहैत छलहुँ. मुदा एडिनबर्ग शहर’क बारे मे अपन अनुभव केँ लिखि तऽ एकटा किताब तैयार भऽ जायत. अपन पेशा मे अपन जरूरत के देखैत एना नहि कऽ सकैत छी. शहर बहुत घुमलहुँ मुदा एडिनबर्ग शहर सन नहि देखलहुँ. विदेश मे रहलोपरान्त भारत’क याद ताजा करैत अछि. ओएह लेफ्ट हैन्ड ड्राइव, सड़क पर चलैत लोक, घास’क पैघ पैघ मैदान, ओहि मे कैनवस’क गेन्द सँ क्रिकेट खेलाइत बच्चा, अपेक्षाकृत बेसी शुद्ध अन्ग्रेजी बाजैत लोक, अतिथि के सत्कार करैत लोक, यूनिवर्सिटी मे चहल पहल, जमि के खाना खाइत लोक. एहि रचना केँ खतम कऽ रहल छी, एहि यात्रा वृताँत के नहिँ. चाहे तऽ पूरा वर्णन करबाक लेल हमरा लग शब्द नहि अछि वा एकरा वर्णन करबाक लेल शब्द बनले नहि अछि.